जब हमने प्यार करने की ठानी..

शब्द-योग अंतत: हमने प्यार करने की ठान ली। ठानने की देर थी कि चारों ओर दुंदुभियां बजने लगीं, आकाश मार्ग से पुष्पवर्षा का क्रम शुरू हो गया। नक्षत्र-सितारे तत्काल ही जगह बदलने लगे। कहीं किसी घर में किसी कोमलांगी ने धीरे से चेहरे से लट हटाकर-- हिश्श-- कहा। इन पार... [पूरी पोस्ट]
writer अनुज

व्यंग्य

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[13 Mar 2009 07:30 AM]

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