प्यास सिर्फ़ पानी से नहीं बुझती

उपस्थित इस जगह बस्ती होने का कोई तुक नही था। यहाँ दुनिया से कोई सड़क नहीं आती थी , और यहाँ मौजूद लोगों ने बाहर जाने के जो भी मार्ग खोजे वो अंततः आपस में ही मिल गए। सूरज यहाँ से हमेशा सर पर ही सवार दिखाई देता था। चमकता , आग फेंकता। पर कहतें हैं न जीवन कहीं भी... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[12 Mar 2009 23:21 PM]

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