व्यंग्य- रंगों को पानी दे मौला
ज्ञानचंद से भगवान बचाए। मिल गए कि ज्ञान देकर ही मानेंगे। आप लाख उनके ज्ञान को धूल की तरह झाड़ते रहिए, वे बिना दिए नहीं मानेंगे। उनके पिटारे में मौसम, समय और परिस्थिति के अनुकूल ज्ञान तैयार रहता है। होली का मौसम देख बंदे के ऊपर झट से एक ज्ञान उन्होंने...
[पूरी पोस्ट]
ओम द्विवेदी
18
1
0
1
0
[12 Mar 2009 15:16 PM]



Shuffle








