ये हवाओं के भरोसे पर नहीं है - मुक्तक
पेट खाली , तन उघाडा , घर नहीं है देख लो फ़िर भी झुकाया सर नहीं है सब चिरागों से अलग है , ये चिराग ये हवाओं के भरोसे पर नहीं है डा उदय मणि...
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डा. उदय ’ मणि ’
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[12 Mar 2009 12:31 PM]



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