क्या मैं अब भी वही हूँ?

संचिका मेरा घर पहाडों के बीच है.यहाँ से शाम को पारसनाथ नजर आता है. वह बच्ची रोज कोशिस करती थी की डुबते सूरज और पार्श्वनाथ को एक पेंटिंग में समेट ले. उसने झील के किनारे बैठकर बहुत कोशिस की वह तैरती हुई मछलियों को अपनी इतनी देर देखे की उसे सपनो में भी यह सब य... [पूरी पोस्ट]
writer लवली कुमारी / Lovely kumari
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[12 Mar 2009 06:04 AM]

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