मैं स्टेशन के पास का वाहन-स्टैण्ड हूं

नया प्रयत्न मैं स्टेशन के पास का वाहन-स्टैण्ड हूं जहां निज-मन के वाहन खड़े करने के लिये अपनी मुस्कराहट के चमकते सिक्कों से राहगीर मेरे प्रेम और दायित्व के टिकट खरीद लेता है । फिर पूरे कर अपने काम लौटता है और अपना मन-वाहन लेकर उड़ जाता है । बहुत-सी ऐसी ही मुस्कराहट... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[12 Mar 2009 05:22 AM]

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