इंतज़ार

Tarun's World आधी ज़िन्दगी तो गुज़र गयी इसी इंतज़ार में कि तुम आओगी तुम्हारी उम्मीद पे कितनी ही राते जल गयी न जाने कितने चाँद तुम्हारे इंतज़ार में बुझ गए वो बरसो से सुबह जो आकर मेरे कानो में कहती थी कि आज तो वो आएगी वो भी बस अब थक गयी है ये सदियों से दिन काटते काट... [पूरी पोस्ट]
writer tarun
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[12 Mar 2009 03:54 AM]

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