दिल में होली जल रही हैं...

अप्रवासी उवाच (Apravasi Uvach) सर्वप्रथम सुश्री पाठकों और सम्पूर्ण चिठ्ठा-जगत को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ। हाय! अप्रवासी जीवन.... होली आई और चुपचाप चली जा रही हैं...न कोई हुडदंग न ही होली की उमंग... कार्यालय में बैठकर अपने संगणक पर देश-दुनिया से आयी बधाई याँ पढ़ रहें हैं और वही न... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)
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[11 Mar 2009 06:22 AM]

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