आज न छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली
होली का जिधर देखो माहौल बना हुआ है, रंग है गुलाल है, छोरे का, गोरी का तन लाल है। ऐसा समा बंधा है कि बस आनन्द साहब और राहुल देव का यह गाना ख़ुद ही याद आ रहा है और गाये जा रहा हूँ। आप गाओ और रंग उड़ाओ कि बच न जाने पाये कोई, होली है!!! Aaj Na ChhoRenge...
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विनय
आनन्द बक्षी
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[10 Mar 2009 20:02 PM]



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