व्यंग्य - होली का महिलाकरण

प्रेम जनमेजय होली का महिलाकरण मेरी एक पत्नी है। एक मेरी पत्नी है। मेरी पत्नी भी एक ही है। मित्रों मैं अपनी पत्नी की कैसे भी व्याख्या करूं, उसमें ‘एक’ शब्द आएगा ही। दूसरा या दूसरी शब्द लाने का मुझमें साहस नहीं है। मेरे एक लेक्चरर मित्र इन दिनों अपने बड़े हुए वेतन... [पूरी पोस्ट]
writer प्रेम जनमेजय
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[10 Mar 2009 12:01 PM]

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