"जिंदगी है अनमोल"
मेरी - तुम्हारी, उसकी - उसका , हम सभी की जिंदगी, मेरी "जान" की लटो की तरह है। जैसे कंघी उलझे लटो को सुलझाती है, और हवा का झोका, उसे पुनः उलझती है। ठीक ऐसे ही हम पल- पल , जिंदगी के उलझे सवालो को, तरह- तरह से सुलझाते है , एक पल सुलझती है तो दुसरे पल पु...
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"Azad Sikander"
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[10 Mar 2009 11:03 AM]



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