होली मुबारक हो

मन पखेरू फ़िर उड़ चला ओढ़ चुनर सतरंगी जो बदला रंग धरती का नीला हठीला आसमां भी अचानक हो गया रंगीन कि आज होली है... चाँदी से उजले मतवाले बादल ज्यौं बिनौलों से गुथे हुए चमकीले रूई के फ़ूल कि अभी-अभी निकल भागी है उजली कपास कि आज होली है... दूर कहीं कलरव करती चली परिन्दों की बरा... [पूरी पोस्ट]
writer सुनीता शानू
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[10 Mar 2009 07:34 AM]

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