आगे की खुदा जाने

तिश्नगी बचपन में राजा और प्रजा की कहानी सुना और पढ़ा करता था। दयालु राजा, क्रूर राजा। प्रजा का भला चाहने वाला राजा। उनकी हाल-चाल जानने के लिए हड्डी भेदने वाली ठंड में भी वेश-भूषा बदल कर महल से निकलने वाला राजा। लेकिन इन कहानियों से जवानी के दिनों में भी पीछा... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश चंद्र
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[10 Mar 2009 05:11 AM]

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