जुग जिए से खेले फिर होली...होली है...

चार पहर होली आ चुकी है...पर हुड़दंग नदारद है. दिल्ली में बिन हुड़दंग के होली देख तो सकता हूं,...पर महसूस करना मुश्किल है. अपने कमरे और फ्लैट तक सिमटी दुनिया में एक दिन की छुट्टी की ख़ुशी..होली की मस्ती पर भारी पड़ती है. इससे ज़्यादा चाह किसी की नहीं. वरना हो... [पूरी पोस्ट]
writer amit kumar
views
22
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
4
[10 Mar 2009 01:43 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix