रंगों का पंचांग ( कहानी )
रंगों का पंचांग रंगों का पंचांगडॉ. कविता वाचक्नवीफोन के पास रखी घड़ी का समय नहीं बदला मैंने, और न ही अपनी कलाई घड़ी का। ये दोनों अब तक यहाँ साढ़े पाँच घंटे के अंतर पर चल रही हैं। घड़ी में दिखते समय का अर्थ सिर्फ समय नहीं होता, उससे बँध कर चलता जीवन भी हो...
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कविता वाचक्नवी
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[09 Mar 2009 17:13 PM]



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