आज मेरा दिन है

प्रतीक माहेश्वरी मैं बस चला जा रहा था... बस चला जा रहा था और सोच रहा था कि एक साल और चला गया... हाँ पूरा एक साल ...रात के १२ पार हो चुके थे और मैं ऑल नाईट कैंटीन से वापस आ रहा था... अकेला ... आज पता नहीं क्यों लगा की लंबे रास्ते से जाना चाहिए... मैं ख़ुद से बातें करन... [पूरी पोस्ट]
writer Pratik Maheshwari

मैं और जिंदगी...

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[09 Mar 2009 17:04 PM]

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