ख़ुद तेरी लागली

प्रत्येक वाणी में महाकाव्य... कुछ ख़ास नहीं... डेढ़ महीने की इस ब्लॉग से छुट्टी के बाद आज अचानक ही मैदान में उतर आया। दरअसल काम की व्यस्तता और कमर का दर्द एक ही रफ़्तार से बढ़ते रहे और ठीक से कुछ भी नहीं हो पा रहा था। अब भी कोई अन्तर नहीं पड़ा है मगर लगा दोस्त कहीं नाराज़ न हो जाएँ... [पूरी पोस्ट]
writer महेन

गढ़वाली गीत

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[09 Mar 2009 12:17 PM]

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