सेब का लोहा
पत्थर भी अपने भीतर थोड़ी मोम बचा कर रखता है ख़ुद आग में होता है बुझ जाने का हुनर जब वह अपने आग होने से थक जाती है गिरते हुए कंकड़ को अभय दे अंगुल भर खिसक जाता है समुद्र एक दिन सबसे हिंसक पशु की आंखों की कोर पर एक गीली लकीर धीरे-धीरे काजल की तरह दिखने...
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Geet Chaturvedi
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[09 Mar 2009 06:16 AM]



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