तुम्हारी महफिलों में जब, हमारी बात होती है ..ग़ज़ल
तुम्हारी महफिलों में जब, हमारी बात होती है ॥ग़ज़ल शरारत बादलों की ये , धरा के साथ होती है जरूरत किस जगह पर है , कहाँ बरसात होती है हमें मालूम है तुमको बहुत अच्छा नहीं लगता तुम्हारी महफिलों में जब , हमारी बात होती है हमारी जिंदगी तो जंग के , मैदान जैस...
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डा. उदय ’ मणि ’
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[09 Mar 2009 04:54 AM]



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