इक्कावान

राही मासूम रज़ा का साहित्य दो गद्दार जमादारों के साथ चले कुछ फौजी बोध गया की राह में इक इक्के की पायल खनकी इक्कावान ने उनके पास पहुँचकर रोकी घोड़ी इक्का पर दो मियाँ जी बैठे रक्खी थी इक थैली इन फौजों गद्दारों ने कुछ हँू हाँ की कुछ कदगन (अस्वीकृति) की सुनो भाइयो, सुनो भाइयो, कथा... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[09 Mar 2009 04:08 AM]

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