न बीतने वाली रात

अनुभूतियाँ हमारे तुम्हारे बीच का फासला बहुत लम्बा था मैं कितना भी चलता नहीं पहुच पाता जब तक कि तुम कदम न उठाते। चांदनी में नहाना और बात है पर उचककर चाँद को छुआ नहीं जाता। मेरे हौसले के क्षत विक्षत पैरों से अविरल बहते रक्त को मेरी आस की कातर नजरें सुखा नहीं पा र... [पूरी पोस्ट]
writer प्रताप नारायण सिंह
views
26
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
5
[09 Mar 2009 03:10 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix