कितनी गिरहें खोली हैं मैने :[Gulzar saab's Poem on Womens Day]
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गुलज़ार साब की एक बेहद संवेदनशील रचना .. कितनी गिरहें खोली हैं मैने, कितनी गिरहें अब बाकी हैं.. ये रचना गुलज़ार साब ने सबसे पहले जयपुर में सुनाई थी.. और बाद में भुपेन्द्र-मिताली के साथ उनके एलबम "चाँद परोसा है" म...
[पूरी पोस्ट]
Pavan
कितनी गिरहें
32
2
0
2
4
[08 Mar 2009 16:06 PM]



Shuffle








