मुशायरा- उठ मेरी जान...!
आज हमारे साथ हैं तसलीमा नसरीन, कैफी आज़मी और...तो ख़वातीनो-हज़रात ये नज़्म बेहिचक आज स्त्री-विमर्श का एंथम कही जा सकती है ,बकौल शायर इसे जंगे-आज़ादी में महिलाओं को मर्दों के साथ बढ़ कर शिरक़त कराने के लिए लिखा गया।जनाब कैफी आज़मी से विशेष आग्रह के साथ स...
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naturica
मुशायरा
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[08 Mar 2009 10:00 AM]



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