एक कविता और कुछ विचार ..महिला दिवश पर

संचिका क्यों उसकी व्यथा लिखने को तुम्हारे शब्द कम पड़ गए कवि उसने देखे सपने नगरों के, गगन चुम्बी इमारतों के क्यों अब देख रही वह पाताल सासंतो के मातृत्व का अमूल्य वरदान क्यों उसे अभिशाप लग रहा देखो उस आदिवाशिन को किस देवता का श्राप लग रहा रोटी की तलास उसे महा... [पूरी पोस्ट]
writer लवली कुमारी / Lovely kumari
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[08 Mar 2009 04:34 AM]

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