आनन्द के पीछे छिपा अवसाद
अगर आपका यह खयाल है कि भ्रष्टाचार हिन्दी व्यंग्य लेखकों की कमज़ोरी है, तो कृपया विख्यात पत्रकार मैक्लीन जे स्टोरर की इस कृति, फॉर्वर्ड ओ पीजेण्ट को ज़रूर पढें. आप मान जाएंगे कि यह तो सर्वव्यापी है. अगर आप पहले से भी ऐसा मानते हैं तो भी कोई हर्ज़ नहीं...
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डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल
व्यंग्य
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[07 Mar 2009 22:10 PM]



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