होली
होली कहीं पिचकारी की मार, कहीं रंगों की बौछार है कहीं उड रहा अबीर, तो कहीं गुलाल है भीगी चोली है, भीगा है चोला भी कुछ रंग यहॉं हैं, कुछ रंग वहॉं भी हैं कुछ रंग चरणों में अर्पित, कुछ माथे पर शोभित हैं कौन अपना कौन पराया है, रंगों ने भेद मिटाया है रंग...
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मथुरा कलौनी
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[07 Mar 2009 20:51 PM]



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