स्‍त्री मुक्ति या देह मुक्ति

अ-शब्‍द स्त्री-शरीर के साथ शुचिता का जो तमगा लटका दिया गया है (पुरुष जिससे पूरी तरह मुक्त है), उससे स्त्री को मुक्त होना ही होगा। विधवा, तलाकशुदा, बलात्‍कार की शिकार स्त्रियां दूसरे पुरुष के लिए क्यों त्याज्य हैं? सच पूछा जाये तो यह समस्या स्त्रियों से ज्याद... [पूरी पोस्ट]
writer ashabd
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[07 Mar 2009 15:08 PM]

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