नए ज़माने में पुरानी माँ
नए ज़माने के हिसाब से ना ढलना था ना ढल पाई माँ बेडरुम और ड्राइंगरुम में फ़र्क नहीं समझती भले ही कोई कितना ही खास आदमी बैठा हो झट सोफ़े पर पसर जाती है माँ लेब्राडोर नस्ल के शानदार चिंकी को इतने बरस बीत गये अभी तक कुत्ता ही कहती है माँ घर का पोंछा लगाती ब...
[पूरी पोस्ट]
sareetha
कुत्ता
27
2
0
2
1
[07 Mar 2009 12:43 PM]



Shuffle








