देयर इज स्टिल समवन हू लव्ज यू

KISHORE CHOUDHARY मन के दौड़ते घोड़ों का रमझोल अनियंत्रित निरंकुश सा बीते दिनों के दृश्यों को इतनी तीव्र गति से बदल रहा था कि कोई स्पष्ट घटना स्थिर नहीं हो पा रही थी, डिजिटल पटल पर आ रहे संकेतों में अवरोध उत्पन्न होने पर दिखाई पड़ने वाले पिक्सल की तरह सब कुछ उलझा-उलझा ग... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore Choudhary

दिल-ऐ-नाकाम

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[07 Mar 2009 04:21 AM]

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