रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे मोहे मारे नजरिया संवरिया रे ........
अब जाके लग रहा है कि होली आने को है,जब किसी छत से फेंका गया गुब्बारा जिसमें भरा था पानी.....मेरे सर को छू कर निकल गया तब मुझे लगा कि होली आ गई है....ऊपर देखा तो एक छत की मुंडेर पर इक बच्चा मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था जैसे.... बच गये बाबू .....खैर मैं...
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vimal verma
फागुन
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[06 Mar 2009 15:36 PM]



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