हिन्दी निकष

हिन्दी निकष एक ग़ज़ल : "रोक पाएंगीं क्या ........." रोक पाएंगीं क्या सलाखें दो-? जब तलक हैं य' मेरी पांखें दो । जिसने सबको दवा-ए-दर्द दिया- आज वो माँगता है- साँसें दो । चाह कर भी निकल नहीं सकता- मुझको घेरे हुए हैं बाँहें दो । वो इबादत हो या की पूजा हो- एक मंजिल है... [पूरी पोस्ट]
writer आनंदकृष्ण

ग़ज़ल

views
25
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[06 Mar 2009 13:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix