तुम्हारे हाथ में टँककर ...
तुम्हारे हाथ में टँककर बने हीरे, बने मोती बटन, मेरी कमीज़ों के। नयन को जागरण देतीं नहायी देह की छुअनें कभी भीगी हुईं अलकें कभी ये चुंबनों के फूल केसर-गंध-सी पलकें सवेरे ही सपन झूले बने ये सावनी लोचन कई त्यौहार तीजों के। बनी झंकार वीणा की तुम्हारी चूड...
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डॉ० कुअँर बेचैन
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[06 Mar 2009 05:10 AM]



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