कहाँ गए आखिर ..बीच के.. उनतीस-तीस पेज...
अ रसे के बाद आज अचानक ही कुछ ख़याल जेहन में उभर आये.. बड़े ही चटक हैं.. कहते हैं यादें अक्सर धुंधली हो जाती हैं..लेकिन यह तो दिनोदिन और चटक होती जा रहीं हैं... हम बदल गएँ हैं.. लेकिन भाषा वही है और लोग भी.. बस वक्त काफी आगे चला गया है महज ३० बरस आगे....
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Vijendra S Vij
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[06 Mar 2009 05:05 AM]



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