दूर कहीं
आख के ख्वाब आखों में ही सजे दिल के अरमान दिल में ही उडे आंचल देदे माँ , सब भूल जाऊ मैं गोदी में जगह दे फ़िर से माँ प्यार के सारे ख्वाब , उड़ने की सारी चाहतें .. तुझ में ही शांत करदे सारे किसी से कोई शिक्वाह नही माँ , बस तेरे दामन की राहत हो किसी गुनाह...
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Dev
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[06 Mar 2009 02:21 AM]



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