होली के दिन भी क्या दिन थे ,

कुछ हम कहें होली के दिन हम बहुत उदास रहते थे। बम्बई की होली में वो बात नहीं जो अलीगढ़ की होली में थी। वहां तो सुबह तीन बजे उठ कर होलिका जलायी जाती थी और उसी आग में गेहूं की नयी बालियां भूनी जाती थी , होली की मुबारकबाद देने का सिलसिला वहीं से शुरु हो जाता था, लोग... [पूरी पोस्ट]
writer anitakumar
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[06 Mar 2009 02:10 AM]

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