नया जीवन

कबीरा खडा बाज़ार में ..... नरेन्द्र गौड़ के शब्दों में सघन सामाजिक अर्थ के साथ वैयक्तिक अर्थ की ध्वनियाँ भी होता हैं । ये खास तौर पर गौर करने की बात है । ऊपर-ऊपर से ये तत्व भले ही पकड़ में नहीं आते लेकिन साथ - साथ कई सवाल खड़े करते चले जाते हैं । गोया कविता वैयक्तिक- निजी सृजन है... [पूरी पोस्ट]
writer sareetha
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[05 Mar 2009 22:33 PM]

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