सालगिरह

Tarun's World आओ इस सालगिरह पे हम वक्त की मुठ्ठी को खोलकर उस हर लम्हे को निकाले जब हम साथ में मुस्कुराये थे उस हर एक लफ्ज़ को फिर से बोले फिर से उस हर एक वादे को दोहराएँ जो मैंने तुमसे और तुमने मुझसे किया था इस सालगिरह पे चलो हम अपनी कसमो की फिर गठडी खोले और अपनी... [पूरी पोस्ट]
writer tarun
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[05 Mar 2009 18:57 PM]

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