आंखें दो काली ऐसे थीं मशहूर शहर में ...
परम श्रधेय गुरु देव श्री पंकज सुबीर जी के आशीर्वाद से तैयार ये ग़ज़ल , आप सबके सामने प्रस्तुत है , आप सभी का प्यार और आशीर्वाद का आकांक्षी हूँ .... आप सभी को होली की अनंत -असीम शुभकामनाएं सहित .... बहर ... २२१ २१२१ १२२१ २१२ भरती रही वो सिसकियां देखा...
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"अर्श"
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[05 Mar 2009 12:23 PM]



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