काश एक बार फ़िर तसलीमा नसरीन किसी नये '' लज्जा '' की रचना का करने में सक्रीय हो जाति .........

कुछ सोंचा कुछ बाक़ी है खुदा करे कि कयामत हो सब ठीक हो जाए "बडी ही चिंता की बात है , बड़ी ही परेशानी की वजह है , और है बडी ही व्यथित कर देने वाली समस्याएं कि एक तरफ़ जहाँ सम्पूर्ण विश्व आतंक के घेरे में सिमटता जा रहा है वहां आज भी विद् जनों के बीच यह आतंकवाद आलोचना और समालोच... [पूरी पोस्ट]
writer anilpandey
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[05 Mar 2009 07:51 AM]

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