फिलहाल
चुनाव और चेतना का समय फिर आ गया। बंधु नमस्कार, 16 मई 09 तक सारी ताकत अब आपके हाथ में है। स्याह भी आप ही करेंगे और सफ़ेद भी। उसके बाद फिर बाड़े के दरवाज़े बंद। लेकिन घबराएं नहीं। हम जनतंत्र के वासी हैं। सब तरफ़ जो हो रहा वह आपके सामने है। पहले खेल भाव...
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गिरिराज किशोर
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[05 Mar 2009 07:37 AM]



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