एक कविता पंखों वाली
एक कविता पंखों वाली उड़ मुंडेर आ जाती है खिलती खुलती हिलती डुलती दर्द दर्द सा गाती है गीले सूखे भूखे रूखे माने रूठे सच्चे झूठे जीवन से जो शब्द हैं टूटे उनको चुनकर लाती है एक कविता पंखों वाली उड़ मुंडेर आ जाती है आंख से झरती हाथ पे गिरती गुनती बुनती स...
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विवेक
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[05 Mar 2009 07:32 AM]



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