क्या वो तुम थे....

mahua यूही गुज़रते मैनें झांका उस रेलगाड़ी की खिड़की से बाहर.....जो मेरी सोच को बाहर की चीज़ों मे तब्दील कर.....एहसास करा रही थी....तुम्हारा..... उन खेतों मे...... किसानों के चेहरों पर...... दूर तक हरे-भरे फैले खेतो की हरियाली में....उन उड़ते परिंदो में...... [पूरी पोस्ट]
writer tanu sharma.joshi

तुम...

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[05 Mar 2009 05:46 AM]

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