Tera Zikr Ho..

मेरी डायरी के पन्ने .. तेरा ज़िक्र हो, तेरी फ़िक्र हो… तेरा नाम लूँ, तेरी याद हो… एक मेहरबानी यह कर सनम, मैं बीमार-ए-इश्क़ तेरे नाम की… मेरी ख़ैरियत मुझसे पूछ ले, कहीं अफ़सोस ना मेरे बाद हो… मैं खिज़ा सही, मुझे प्यार कर, यूँ तलब ना कर तू बहार की… ऐसे समेट ले मुझे धड़कन मे,... [पूरी पोस्ट]
writer Shikha (MahiYa)

Hindi poem

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[05 Mar 2009 04:02 AM]

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