लड़कियों की शाम

Gender Jihad जेण्डर जिहाद इनकी कैसी साँझ? इनकी ज़िंदगी में तो हर वक्त है साँझ का धुँधलका साँझ का क्यों रहे इन्हें इंतज़ार क्या करें इस वेला में, यही सवाल लेकर आती है हर शाम काश इस साँझ में ये भी करें ता-थया उछलें-कूदें, मचाएँ धमाल पर कहाँ हैं ये शाम कोई इनके दिल से पूछे ये तो... [पूरी पोस्ट]
writer admin
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[04 Mar 2009 03:05 AM]

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