GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य पटना के सब मुल्ला यूं तो कहने को थे वहाबी लेकिन सर से पांवों तलक थे सारे मुल्ला हिन्दी उन सबने जब चार तरफ यह घोर निराशा देखी तब कुरान के जुजदानों (बस्ता) में एक कटार-सी चमकी उन सबने तब पाल बनाई पैगम्बर के दामन की सुनो भाइयो, सुनो भाइयो, कथा सुनो सत्त... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[04 Mar 2009 03:04 AM]

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