हंसिकाएं..कुछ हल्के-फुल्के पल.

मुसाफ़िर जीवन में हंसने के मौके खुश रहने के मौके बड़े कम हैं.इसी तंगदिली के वक़्त तन्हादिली के वक़्त आपके चेहरों पे एक मुस्कान देता हूँ.कुछ देर के लिए कम-से-कम ये हंसी आपको सुकून दे. "एक बहु और एक सास उनके पुत्र थे -श्री प्रकाश बैठे थे उदास ,अचानक माँ ने कहा-... [पूरी पोस्ट]
writer मुन्ना के पांडेय(कुणाल)
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[03 Mar 2009 23:45 PM]

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