आँख के जल में याद

उपस्थित एक सुंदर सी लगने वाली छतरी के पास खडा टूरिस्ट उसे मुग्ध भाव से देखता है।पत्थरों पर नक्काशी करते वक्त कारीगर के मन में ज़रूर कोई कोमल भाव उपजा होगा।पत्नी का स्पर्श शायद उसने फ़िर से महसूस किया होगा जो सृष्टि के एक और मामूली दिन को उसके लिए विशिष्ट बना... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[03 Mar 2009 21:17 PM]

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