आखरी मुलाकात
आज जाने से पहेले उसने भी कुछ कहा था गम का थोड़ा सा असर उस पेर भी हो रहा था चुप होने से पहेले उन के लब हिले थे उस खामोशी के नगमे हम ने भी सुने थे एक लंबा दयरा सा बन गया अचानक जोर जोर से दे रहा था ये दिल सिने पर दस्तक गुज़र गई वो शाम हम कुछ भी ना कहेना...
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Neeraj
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[03 Mar 2009 16:55 PM]



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