भोजपुरी गजल
एक मन भ्रमर फेरु गुनगुनाइल बा प्रेम-सर में कमल फुलाइल बा आंख के राह चल के, आंतर में आज चुपके से के समाइल बा दूब के ओस कह रहल केहू रात भर नेह से नहाइल बा रस-परस-रुप-गंध-शब्दन के वन में, मन ई रहल लोभाइल बा जिंदगी गीत हो गइल बाटे राग में प्रान तक रंगाइ...
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ashabd
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[03 Mar 2009 04:40 AM]



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