दृश्य का चित्र बनाकर चुपचाप क्यों निकल जाती है कविता
तकरीबन पांच साल पहले की एक गर्म दोपहर में ठंडी चाय के साथ रांची में रामजी भाई ने कहा था- "इधर की कविता अपने समय का भरपूर दृश्य तो बनाती है, लेकिन उसमें मुठभेड के तरीके सिरे से गायब हैं." अनिल अंशुमन और सत्यप्रकाश चौधरी के साथ उस बैठकी में कविता पर लं...
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सचिन ..........
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[03 Mar 2009 04:10 AM]



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